भारत में फांसी अधारित प्रश्नोत्तर
फांसी (Death Penalty)
* हमारे कानून में फाँसी की सजा सबसे बड़ी सजा हैं
* फांसी की सजा सुनाने के बाद पेन की निब इसलिए तोड़ दी जाती है क्योकिं इस पेन से किसी का जीवन खत्म हुआ है तो इसका कभी दोबारा प्रयोग ना हो
* एक कारण ये भी है कि एक बार फैसला लिख दिये जाने और निब तोड़ दिये जाने के बाद खुद जज को भी यह अधिकार नहीं होता कि उस जजमेंट की समीक्षा कर सके या उस फैसले को बदल सके या पुनर्विचार की कोशिश कर सके
* फांसी देते वक्त वहां पर जेल अधीक्षक, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, जल्लाद और डाॅक्टर मौजूद रहते हैं इनके बिना फांसी नही दी जा सकती
* जल्लाद फांसी देने से पहले बोलता है कि मुझे माफ कर दो हिंदू भाईयों को राम-राम, मुस्लिम को सलाम, हम क्या कर सकते है हम तो है हुकुम के गुलाम
* फाँसी देना जेल अधिकारियों के लिए बहुत बड़ा काम होता हैं और इसे सुबह होने से पहले इसलिए निपटा दिया जाता है ताकि दूसरे कैदी और काम प्रभावित ना हो
* एक नैतिक कारण ये भी हैं कि जिसको फांसी की सजा सुनाई गई हो उसे पूरा इंतजार कराना भी उचित नही हैं सुबह फांसी देने से उनके घर वालो को भी अंतिम संस्कार के लिए पूरा समय मिल जाता हैं
* आखिरी इच्छा पूछे बिना किसी को फांसी नहीं दी जा सकती
* फांसी से पहले मुजरिम के चेहरे को काले सूती कपड़े से ढक दिया जाता है
* 10 मिनट के लिए फांसी पर लटका दिया जाता हैं फिर डाॅक्टर फांसी के फंदे में ही चेकअप करके बताता हैं कि वह मृत है या नहीं उसी के बाद मृत शरीर को फांसी के फंदे से उतारा जाता हैं
* सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के मुताबिक जिसे मौत की सजा दी जाती है उसके रिश्तेदारों को कम से कम 15 दिन पहले खबर मिल जानी चाहिए ताकि वो आकर मिल सकें
* फांसी की सजा पाए कैदियों के लिए फंदा जेल में ही सजा काट रहा कैदी तैयार करता है आपको अचरज हो सकता है, लेकिन अंग्रेजों के जमाने से ऐसी ही व्यवस्था चली आ रही हैं
* देश के किसी भी कोने में फांसी देने की अगर नौबत आती है तो फंदा सिर्फ बिहार की बक्सर जेल में ही तैयार होता है इसकी वजह यह है कि वहां के कैदी इसे तैयार करने में माहिर माने जाते हैं
* फांसी के फंदे की मोटाई को लेकर भी मापदंड तय है फंदे की रस्सी डेढ़ इंच से ज्यादा मोटी रखने के निर्देश हैं इसकी लंबाई भी तय हैं
* फाँसी के फंदे की कीमत बेहद कम हैं जब धनंजय को फांसी दी गई थी तब यह 182 रुपए में जेल प्रशासन को उपलब्ध कराया गया था
* भारत में फांसी देने के लिए बस 2 ही जल्लाद हैं ये जल्लाद जिन राज्यों में रहते हैं वहाँ की सरकार इन्हें 3,000 रूपए महीने के देती हैं और किसी को फांसी देने पर अलग से पैसे दिए जाते हैं
* आतंकवादी संगठनो के सदस्यों को फांसी देने पर उनको मोटी फीस दी जाती हैं जैसे इंदिरा गांधी के हत्यारों को फांसी देने पर जल्लाद को 25,000 रूपए दिए गए थे
* हमारे देश में दुर्लभतम मामलों में मौत की सजा दी जाती है
* केवल राष्ट्रपति ही फांसी रोक सकता है
1947 में आजादी मिलने के बाद से लेकर अब तक (2020) में देशभर में कुल 724 लोगों को फांसी दी गई आखिरी फांसी 2020 में निर्भया के 4 गुनाहगारो को दी गई
देश में पहली फांसी 15 नवंबर 1949 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारों नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को अंबाला सेंट्रल जेल में दी गई थी
निर्भया कांड के 4 दोषियों को 2020 में एक साथ फांसी दी गई है आजाद भारत में यह दूसरा मौका है जब एक साथ 4 लोगों को फांसी दी गई इससे पहले 25 अक्टूबर 1983 को यरवडा जेल में 4 दोषियों को 10 लोगों की हत्या करने के आरोप पर फांसी दी गई थी
* हमारे कानून में फाँसी की सजा सबसे बड़ी सजा हैं
* फांसी की सजा सुनाने के बाद पेन की निब इसलिए तोड़ दी जाती है क्योकिं इस पेन से किसी का जीवन खत्म हुआ है तो इसका कभी दोबारा प्रयोग ना हो
* एक कारण ये भी है कि एक बार फैसला लिख दिये जाने और निब तोड़ दिये जाने के बाद खुद जज को भी यह अधिकार नहीं होता कि उस जजमेंट की समीक्षा कर सके या उस फैसले को बदल सके या पुनर्विचार की कोशिश कर सके
* फांसी देते वक्त वहां पर जेल अधीक्षक, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, जल्लाद और डाॅक्टर मौजूद रहते हैं इनके बिना फांसी नही दी जा सकती
* जल्लाद फांसी देने से पहले बोलता है कि मुझे माफ कर दो हिंदू भाईयों को राम-राम, मुस्लिम को सलाम, हम क्या कर सकते है हम तो है हुकुम के गुलाम
* फाँसी देना जेल अधिकारियों के लिए बहुत बड़ा काम होता हैं और इसे सुबह होने से पहले इसलिए निपटा दिया जाता है ताकि दूसरे कैदी और काम प्रभावित ना हो
* एक नैतिक कारण ये भी हैं कि जिसको फांसी की सजा सुनाई गई हो उसे पूरा इंतजार कराना भी उचित नही हैं सुबह फांसी देने से उनके घर वालो को भी अंतिम संस्कार के लिए पूरा समय मिल जाता हैं
* आखिरी इच्छा पूछे बिना किसी को फांसी नहीं दी जा सकती
* फांसी से पहले मुजरिम के चेहरे को काले सूती कपड़े से ढक दिया जाता है
* 10 मिनट के लिए फांसी पर लटका दिया जाता हैं फिर डाॅक्टर फांसी के फंदे में ही चेकअप करके बताता हैं कि वह मृत है या नहीं उसी के बाद मृत शरीर को फांसी के फंदे से उतारा जाता हैं
* सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के मुताबिक जिसे मौत की सजा दी जाती है उसके रिश्तेदारों को कम से कम 15 दिन पहले खबर मिल जानी चाहिए ताकि वो आकर मिल सकें
* फांसी की सजा पाए कैदियों के लिए फंदा जेल में ही सजा काट रहा कैदी तैयार करता है आपको अचरज हो सकता है, लेकिन अंग्रेजों के जमाने से ऐसी ही व्यवस्था चली आ रही हैं
* देश के किसी भी कोने में फांसी देने की अगर नौबत आती है तो फंदा सिर्फ बिहार की बक्सर जेल में ही तैयार होता है इसकी वजह यह है कि वहां के कैदी इसे तैयार करने में माहिर माने जाते हैं
* फांसी के फंदे की मोटाई को लेकर भी मापदंड तय है फंदे की रस्सी डेढ़ इंच से ज्यादा मोटी रखने के निर्देश हैं इसकी लंबाई भी तय हैं
* फाँसी के फंदे की कीमत बेहद कम हैं जब धनंजय को फांसी दी गई थी तब यह 182 रुपए में जेल प्रशासन को उपलब्ध कराया गया था
* भारत में फांसी देने के लिए बस 2 ही जल्लाद हैं ये जल्लाद जिन राज्यों में रहते हैं वहाँ की सरकार इन्हें 3,000 रूपए महीने के देती हैं और किसी को फांसी देने पर अलग से पैसे दिए जाते हैं
* आतंकवादी संगठनो के सदस्यों को फांसी देने पर उनको मोटी फीस दी जाती हैं जैसे इंदिरा गांधी के हत्यारों को फांसी देने पर जल्लाद को 25,000 रूपए दिए गए थे
* हमारे देश में दुर्लभतम मामलों में मौत की सजा दी जाती है
* केवल राष्ट्रपति ही फांसी रोक सकता है
1947 में आजादी मिलने के बाद से लेकर अब तक (2020) में देशभर में कुल 724 लोगों को फांसी दी गई आखिरी फांसी 2020 में निर्भया के 4 गुनाहगारो को दी गई
देश में पहली फांसी 15 नवंबर 1949 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारों नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को अंबाला सेंट्रल जेल में दी गई थी
निर्भया कांड के 4 दोषियों को 2020 में एक साथ फांसी दी गई है आजाद भारत में यह दूसरा मौका है जब एक साथ 4 लोगों को फांसी दी गई इससे पहले 25 अक्टूबर 1983 को यरवडा जेल में 4 दोषियों को 10 लोगों की हत्या करने के आरोप पर फांसी दी गई थी
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