GK हमारा मिशन हमारी एकता
📹हमारा मिशन हमारी एकता
मेरे नास्तिक होने के बाद हुए फायदों की लिस्ट-
1- किसी भूत प्रेत, पीपल बरगद से डर नहीं लगता।
2-सांप बिच्छू तक से डर ख़त्म हो गया है प्यार बढ़ गया है।
3- पूजा पाठ- कथा प्रवचन में चवन्नी खर्च नहीं होती।
4- गाय और कुत्ते पर एक समान प्यार आता है।
5- अपने किये अच्छे काम का क्रेडिट खुद लेता हूँ और गलती को हरि इच्छा न मान कर आगे दोहराने से परहेज करत हूँ।
6- बिल्ली या नेवले के रास्ता काट जाने पर, घर से निकलते ही छींक आने पर या खाली बाल्टी देख कर वापस नहीं लौटना पड़ता।
7- किसी कार्य की संभावित सफलता के लिए किसी देवी देवता को तेल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
9- कोई भी शुभ काम शुरू करने के लिए सत्य नारायण की कथा सुनके अनुमति नहीं लेनी पड़ती।
10- नरक में जाने के डर से हर चबूतरे, देवोत्थान, लाल झंडा लगाए जगह पर सर नहीं झुकाना पड़ता।
11- 11, 21, 51 जैसी शुभ संख्याओं से कुछ लेना लादना नहीं।
12- सुबह सुबह अखबार में राशिफल देख कर अपने दिन का शेड्यूल नहीं बनाना पड़ता।
13- ज़िन्दगी मस्ती से कट रही है छोटी छोटी खुशियों में बड़ा बड़ा मजा लेते हुए।
एक और सबसे ख़ास
14- किसी को भी जाति, लिंग, नागरिकता, रंग, क्षेत्र, अमीरी गरीबी के आधार पर अलग नहीं समझता। इंसान को सिर्फ इंसान समझता हूँ
🔰हमारा मिशन हमारी एकता🔰
नास्तिक हूँ । कृपया मुझे होली एवं समस्त समस्त त्यौहारों की शुभ कामनाएं ना भेजे।
हाँ मैं नास्तिक हूँ क्योकि मैं शुद्र हूँ , हिन्दू रीति रिवाज अनुसार मैं नीच जाती से हूँ । धर्म ग्रथो में लिखा है।
मुझे शिक्षा प्राप्त करने, मंदिर में प्रवेश करने, यहां तक कि अच्छे कपड़े पहनने का भी अधिकार नही था।
हाँ मैं नास्तिक हूँ क्योकि सदियो से देवी देवता थे पर इन्होंने मेरे पुर्वजो का उद्धार नही किया, उन्हें गुलामी से आजादी नही दिलाई ।
ओर अगर आज मुझे कुछ अधिकार मिले है तो उसका कारण ये हिन्दू धर्म ग्रंथ, रीति रिवाज या त्योहारों की वजह से नही है। मेरे पूर्वज बाबा साहेब आम्बेडकर द्वारा रचित* संविधान की वजह से मिले है।
मैं बाबा साहेब का ऋणी हूँ । मैं उनका अनुयायी हूँ । जिन्होंने 2500 साल की गुलामी से मुझे ओर मेरे आने वाली पीढ़ी का उद्धार किया है।
इसलिए मैं इन त्योहारों को नही मानता मैं इस देश के संविधान को मानता हूं वही मेरा धर्म ग्रंथ है। जो मुझे शिक्षा, समानता, स्वतंत्रता, ओर बन्धुत्वता सिखाता है।
हां हां हां मैं नास्तिक हूँ क्योकि आज जो मेरे अधिकार आरक्षण, मंदिर प्क्षमे ओर समानता का विरोध करते है वो सब हिन्दू धर्म की ऊंची जाति के लोग है। हिन्दू धर्म के अनुयायी ही है। जिन्हें मैं ओर मेरे वर्ग के लोग नही सुहाते है। हम लोगो के साथ वर्तमान में भी गांवों में छुवाछुत होती है। यहाँ तक कि नँगा करके जुलूस निकाला जाता है। घोर अत्याचार होता है।और अत्याचार करने वाले भी हिन्दू धर्म की ऊंची जाति के लोग ही होते है।
इसलिए मैं नास्तिक हूँ कृपया मुझे किसी भी धर्म के त्योहार, रीति रिवाज की बधाई ना दे, क्योकि मैने सच्चा इतिहास पढ़ लिया है।
बाबा_साहेब ने कहा है जो कौम अपना इतिहास नही जानती वो अपना इतिहास भी नही बना सकती है।
मेरी किसी बात का आप महानुभव को बुरा लगा हो तो में हृदय से मैं क्षमा चाहता हूं .
मेरे नास्तिक होने के बाद हुए फायदों की लिस्ट-
1- किसी भूत प्रेत, पीपल बरगद से डर नहीं लगता।
2-सांप बिच्छू तक से डर ख़त्म हो गया है प्यार बढ़ गया है।
3- पूजा पाठ- कथा प्रवचन में चवन्नी खर्च नहीं होती।
4- गाय और कुत्ते पर एक समान प्यार आता है।
5- अपने किये अच्छे काम का क्रेडिट खुद लेता हूँ और गलती को हरि इच्छा न मान कर आगे दोहराने से परहेज करत हूँ।
6- बिल्ली या नेवले के रास्ता काट जाने पर, घर से निकलते ही छींक आने पर या खाली बाल्टी देख कर वापस नहीं लौटना पड़ता।
7- किसी कार्य की संभावित सफलता के लिए किसी देवी देवता को तेल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
9- कोई भी शुभ काम शुरू करने के लिए सत्य नारायण की कथा सुनके अनुमति नहीं लेनी पड़ती।
10- नरक में जाने के डर से हर चबूतरे, देवोत्थान, लाल झंडा लगाए जगह पर सर नहीं झुकाना पड़ता।
11- 11, 21, 51 जैसी शुभ संख्याओं से कुछ लेना लादना नहीं।
12- सुबह सुबह अखबार में राशिफल देख कर अपने दिन का शेड्यूल नहीं बनाना पड़ता।
13- ज़िन्दगी मस्ती से कट रही है छोटी छोटी खुशियों में बड़ा बड़ा मजा लेते हुए।
एक और सबसे ख़ास
14- किसी को भी जाति, लिंग, नागरिकता, रंग, क्षेत्र, अमीरी गरीबी के आधार पर अलग नहीं समझता। इंसान को सिर्फ इंसान समझता हूँ
🔰हमारा मिशन हमारी एकता🔰
नास्तिक हूँ । कृपया मुझे होली एवं समस्त समस्त त्यौहारों की शुभ कामनाएं ना भेजे।
हाँ मैं नास्तिक हूँ क्योकि मैं शुद्र हूँ , हिन्दू रीति रिवाज अनुसार मैं नीच जाती से हूँ । धर्म ग्रथो में लिखा है।
मुझे शिक्षा प्राप्त करने, मंदिर में प्रवेश करने, यहां तक कि अच्छे कपड़े पहनने का भी अधिकार नही था।
हाँ मैं नास्तिक हूँ क्योकि सदियो से देवी देवता थे पर इन्होंने मेरे पुर्वजो का उद्धार नही किया, उन्हें गुलामी से आजादी नही दिलाई ।
ओर अगर आज मुझे कुछ अधिकार मिले है तो उसका कारण ये हिन्दू धर्म ग्रंथ, रीति रिवाज या त्योहारों की वजह से नही है। मेरे पूर्वज बाबा साहेब आम्बेडकर द्वारा रचित* संविधान की वजह से मिले है।
मैं बाबा साहेब का ऋणी हूँ । मैं उनका अनुयायी हूँ । जिन्होंने 2500 साल की गुलामी से मुझे ओर मेरे आने वाली पीढ़ी का उद्धार किया है।
इसलिए मैं इन त्योहारों को नही मानता मैं इस देश के संविधान को मानता हूं वही मेरा धर्म ग्रंथ है। जो मुझे शिक्षा, समानता, स्वतंत्रता, ओर बन्धुत्वता सिखाता है।
हां हां हां मैं नास्तिक हूँ क्योकि आज जो मेरे अधिकार आरक्षण, मंदिर प्क्षमे ओर समानता का विरोध करते है वो सब हिन्दू धर्म की ऊंची जाति के लोग है। हिन्दू धर्म के अनुयायी ही है। जिन्हें मैं ओर मेरे वर्ग के लोग नही सुहाते है। हम लोगो के साथ वर्तमान में भी गांवों में छुवाछुत होती है। यहाँ तक कि नँगा करके जुलूस निकाला जाता है। घोर अत्याचार होता है।और अत्याचार करने वाले भी हिन्दू धर्म की ऊंची जाति के लोग ही होते है।
इसलिए मैं नास्तिक हूँ कृपया मुझे किसी भी धर्म के त्योहार, रीति रिवाज की बधाई ना दे, क्योकि मैने सच्चा इतिहास पढ़ लिया है।
बाबा_साहेब ने कहा है जो कौम अपना इतिहास नही जानती वो अपना इतिहास भी नही बना सकती है।
मेरी किसी बात का आप महानुभव को बुरा लगा हो तो में हृदय से मैं क्षमा चाहता हूं .
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